इश्क की तस्वीर

दुनिया की नज़रों में गिरना मेरे किस काम आया,
अपनों से बिछड़ कर वो बेवफा गैरों के काम आया।

मैं भूल चुका था की अपने ही बेवफाई करते हैं ,
दुनिया मेरी बरबाद करके उसे ज़रा भी रहम ना आया।

अगर वो वफादार होती तो यूँ बेवफाई ना करती,
मुझे उसका इंतज़ार रहा, पर वो लौट कर ना आया।

जिंदगी तो काफिरों के संग गुजर ही जायेगी,
पर जिसे दोस्त समझा वो दुश्मनी करने आया।

क़त्ल ही करना था तो सामने से करती,
हमदर्द बनकर क्यों उसने पीठ में खंजर चलाया ।

दोस्त बनाकर फिर हमसे दुश्मनी ना हो सकी,
क्यो की बेवफाई उसने क्यों उसे मुझ पर प्यार ना आया।

नजरो में उसकी अब शर्म के छींटे है,
अब तन्हाई ने सताया तो मेरे पास चला आया ।

फकत मुझे उसकी ज़रूरत भी क्या है,
अब ज़नाज़ा मेरा देखकर क्यों उसे रोना आया।
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